क्या एक लड़की वास्तव में लक्ष्मी होती है ? ( Is a girl really Lakshmi ? )
आज के समय में जहाँ लड़के और लड़कियों में कोई फर्क नहीं है। हमारी बेटियां आज हर क्षेत्र में आगे है। उन्हें विशिष्ठ अधिकार प्राप्त है। सरकार ने उनके लिए बहुत सी योजनाए भी बनाई है। उन्हें बहुत से क्षेत्र में आरक्षण भी मिलता है। ये सारे वाक्य हम अक्सर सुनते रहते है। पर इन वाक्यों में कितनी सच्चाई है ? मेरे कहने का तात्पर्य यह है की क्या सच में लड़कियों को समानता का अधिकार प्राप्त है ? जब हमारे समाज में हमारे या किसी और के यहाँ लड़की पैदा होती है तो हम कहते है " बधाई हो आपके घर लक्ष्मी आयी है। " पर क्या वाकई में हम उसे लक्ष्मी मान पाते है ? क्या वाकई में उसे एक देवी का सम्मान मिल पाता है ? एक ओर जहाँ हमारा देश इतना आगे बढ़ चुका है , हमारे देश की महिलाओ ने इतिहास रचा है चाहे वो रानी लक्ष्मी बाई हो , रानी अवन्ति बाई , सावित्री बाई फुले हो , मदर टेरेसा हो , हो या कल्पना चावला । वही दूसरी ओर ऐसी भी वर्ग की महिलाये है...